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Showing posts from September, 2019

स्वतंत्र भारत की दुःख भरी लम्हें।(15 अगस्त भासन)

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हैलो दोस्तो  आज मैं स्वतंत्रता दिवस पर बहुत ही अच्छा से   अपना भावना को प्रस्तान किया हैं,  जरूर पढ़िए उम्मीद हैं कि आपलोगो को  भी बहुत  अच्छा लगेगा। आदरणीय परम पूज्य प्राचार्य महोदय  शिक्षक  बृंद और  मेरे प्यारे - प्यारे भाईयो और बहनों ।  बड़े हर्ष  की बात है , कि आज ही के दिन यानी आजादी के( 70++year ke hisab se) वे बर्ष पूर्व के शुभ अवसर पर मुझ जैसे  अल्पज्ञ को  प्राचार्य द्वारा कुछ कहने  का अवसर मिला है। इस दौरान अगर मुझमे  कोई  त्रुटियां नजर आए तो  अबोध बालक समझकर  मुझे माफ़ करने की  कृपा करें। आज ही के  दिन हमारा देश लगभग  200 बर्षो तक की जकड़ी हुईं  गुलामी से मुक्त हुआ और हम आजाद हुए । आप लोग सभी भली भांति जानते है कि यह आजादी हमें  यूं ही नहीं मिल गया । इसके लिए  अनेक वीर सपूतों को फांसी के फंदे पर चढ़ना पड़ा सीने पर गोलियां  खाने पड़े ओर जेल के अंदर घिस पिटकर मरने पड़े । तब जाकर इस दिन का नया  सूर्योदय हुआ और यह खुशहाल दिन हमें देखने को मिल...

जीवनी एक गरीब परिवार की

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एक दिन की बात हैं। गांव में  एक  छोटा सा परिवार  रहता था । जो बहुत ही गरीब  परिवार  था। वो लोगों के घरों में  कुछ भी काम करता  और   उसके बदले जो मिलता पैसा या चावल   लेकर  शाम को घर लौट आता । इसी तरह अपना परिवार के साथ जिदंगी गुजारता था । उस गरीब आदमी का नाम  था रमन नाथ उसके  चार बच्चें थे।  दो बेटा और दो बेटी  दोनों बेटियों को शादी  हो चुकी थीं। और दोनों बेटे अपने पिता रमन नाथ के साथ सुबह को कम की तलाश में निकल जाते। अगर किसी के घर में काम मिलता तो कर लेते नहीं तो फिर अपना घर वापस लौट आते । एक दिन रमन नाथ अपने दोनो बच्चों लेकर जंगल की ओर लकड़ी लाने  चल दिए।  लकड़ी काट कर तीनों अपना अपना बोझा बांध कर एक पेड़ के नीचे बैठ कर  आराम कर रहे थे। तभी  जंगल के रास्ते से  होकर  गाॅव  के एक बच्चा  शहर से पढ़ाई कर के अपने चाचा के साथ मोटर साइकिल में बैठ कर घर लौट रहे थे, तो अचानक उनके छोटे बेटे श्याम नाथ का नजर उस बच्चे पर पड़ा। तो उसने अपने पिता से पूछा ? बापू...