स्वतंत्र भारत की दुःख भरी लम्हें।(15 अगस्त भासन)

हैलो दोस्तो  आज मैं स्वतंत्रता दिवस पर बहुत ही अच्छा से   अपना भावना को प्रस्तान किया हैं,  जरूर पढ़िए
उम्मीद हैं कि आपलोगो को  भी बहुत  अच्छा लगेगा।

आदरणीय परम पूज्य प्राचार्य महोदय  शिक्षक  बृंद और  मेरे प्यारे - प्यारे भाईयो और बहनों ।  बड़े हर्ष  की बात है , कि आज ही के दिन यानी आजादी के( 70++year ke hisab se) वे बर्ष पूर्व के शुभ अवसर पर मुझ जैसे  अल्पज्ञ को  प्राचार्य द्वारा कुछ कहने  का अवसर मिला है।

इस दौरान अगर मुझमे  कोई  त्रुटियां नजर आए तो  अबोध बालक समझकर  मुझे माफ़ करने की  कृपा करें।

आज ही के  दिन हमारा देश लगभग  200 बर्षो तक की जकड़ी हुईं  गुलामी से मुक्त हुआ और हम आजाद हुए ।
आप लोग सभी भली भांति जानते है कि यह आजादी हमें  यूं ही नहीं मिल गया । इसके लिए  अनेक वीर सपूतों को फांसी के फंदे पर चढ़ना पड़ा सीने पर गोलियां  खाने पड़े ओर जेल के अंदर घिस पिटकर मरने पड़े । तब जाकर इस दिन का नया  सूर्योदय हुआ और यह खुशहाल दिन हमें देखने को मिला।

* आजादी खेल मत समझो बड़ी मुश्किल से मिलती ,जो देते है कुर्बानी  फ त ह उनको ही मिलती हैं।



 स्वतंत्रता  की उसी दुख  भरी कहानी को तरोताजा करने के लिए आज पूरे भारत वर्ष में  स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। अंग्रेज़ के आने के पहले हमारा भारत सोने की चिड़िया कहलाता था । यांहा की समृद्धि के लालच में अंग्रेज़  यहां व्यापारी के रूप में आए उस समय भारत अनेक प्रांतों में विभक्त था। इसी कमजोरी को देख कर अंग्रेजो ने अनेक प्रांतों के राजाओं को एक दूसरे से  लड़वाने लगे  और खुद फ़ायदा उठाने लगे।

इस तरह पूरे भारत वर्ष में उसका शासन स्थापित हो गया। और अंग्रेजो का हुकुमत चलने लगा उन्होंने हमारे देश में एक लंबे समय तक शासन किया । और भारतीयों पर अत्याचारी कार्यों द्वारा बेहद शोषण किया अंग्रेजो ने भारतीयों को जानवरो से भी बेहतर समझते थे  ऐसी स्थिति भारत के राष्ट्रीय भक्तों   को सहा न जा सका । और भारत को विदेशियों  से स्वतंत्र कराने का विचार किया।
सन् 1857 ई०  में वे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम छेड़ दिया।इस संग्राम में लक्ष्मी बाई , वीर  कुंवर सिंह ,मंगल पांडे और तात्या टोपो जैसे अनेक वीर सपूतों ने भाग लिया ।ओर अंग्रेज़ो को भागने में जुट गए ।
लेकिन फिर भी हम विफल हो  गए ।इसका मूल कारण था ।भारतीयों में एकता की कमी थी । ऐसे में भारत माता यहां की एकता को जगाने के लिए कहीं।


* मेरी जवान तुझको तेरी मां ने पुकारा हमे  दास्तां  से मुक्त करा यह काम तुम्हारा तूफ़ानों से मत घबराना बढ़ते कदम ही जाना खाने पड़े गोली तो सीने पर ही खाना सदैव जमाना याद करो एक ऐसा इतिहास बनाना।


भारतीयों वीर सपूतों अपनी मां की करुणा और वेदना को सुन कर अपनी एकता को बढ़ाने का संकल्प लिया कि..

* हम भारत के भावी सैनिक डर कर न रह पाएंगे ।कर के दुश्मनों का सामना भारत की लाज बचाएंगे।


इसके बाद भारतीयों वीर सपूतों में एक नया जोश पैदा हुआ और भारत को आजाद कराने के लिए सम्पूर्ण भारत में क्रांति की लहर दौड़ा दी। इन सपूतों में महात्मा गांधी , सुभाष चन्द्र बोस , चन्द्र शेखर आजाद , भगत सिंह तथा  लाल, बाल, पाल प्रमुख थे।
एक और सुभाष चन्द्र बोस ,चन्द्र शेखर आजाद ,ओर भगत सिंह जैसे धुरंधरों ने अंग्रेजो के सीने में गोलियां दागने में जुट गए।तो दूसरी और महात्मा गांधी , गोपाल कृष्ण गोखले  तथा बाल  गंगाधर  तिलक जैसे  देश भक्तो आंदोलन के बदौलत आजादी छिन्ने  में अथक  प्रयास तब तक करते रहे जब तक कि उनकी अंतिम  सांसे  खत्म न हो गई हो।
महत्मा गांधी  द्वारा आजादी के लिए  अनेक आंदोलन चलाया गया। लेकिन अंतिम आंदोलन  8 अगस्त 1942 को चलाया गया था। जिसे हम भारत छोड़ो आंदोलन के नाम से जानते है।
यह आंदोलन भारतीयों के लिए अतिमहत्वपूर्ण  रहा जिसके सामने अंग्रेज़  अधिक देर तक टिक नहीं सके  और भारत को आजादी देने के लिए विवश हो गए। इस  प्रकार  अंतोगत्वा भारत  15 अगस्त  1947 के अधी रात को आजाद हो गया। और  सदियों बाद भारतीयों ने स्वतंत्रता की नई सांसे लगा दी। और भारत वासियों को अमन- चयन  मिला।

अब हमे इस स्वतंत्रता तथा अखंडता  को बनाए रखने के लिए आज हमें यह शपथ लेना हैं, कि..

*  ऊंचा रहे दुनिया में शान तिरंगा वीरो की शहदत का पहचान तिरंगा।जो इस मुल्क के दुश्मन हैं,इस मुल्क में आएं अब खींच लेंगे जिस्म से अब  जान तिरंगा।


लेकिन अब भी बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है, कि भारत आजाद तो हो गया ,लेकिन जिन्ना की वे बुनियादी जिद्द ने भारत को दो भागो में  बांट दिया।
भारत और पाकिस्तान ।
इसके  लिए भाई - भाई  बिछड़ गए  घर- द्वार बट गए ओर खेत-  खलिहान  भी बट गए।
इससे देश की एकता में भी गहरा प्रभाव पड़ा।

*  तुझवे जिंदगी की यही ख्वाइश है, कि इल्म ही हमारा वतन बने। वतन पर ही मर मिट जाएं तिरंगा ही हमारा  काफ़न बने।


हमारे आजाद हुए आज इतने वर्ष बीत गए।
लेकिन इतनी लंबी अवधि तक भी हमारे समाज में फैली हुई कुप्रथा मिट नहीं पा रही है ।बल्कि और अधिक जोर पकड़ती जा रही है इन कुप्रथा में जातिवाद , दहेज प्रथा , भ्रष्टाचार, प्रमुख है, ये सभी हमारे देश के मजबूत दीवारों को खोखला बनाते जा रहा है। दहेज प्रथा के कारण कितनी लड़कियां  आत्महत्या कर लेती है।
गांधी जी का सपना था हमारे देश में सभी जगह खुशहाली हो तथा सभी लोग सुखी सम्पन्न हो लेकिन गांधी के इस सपना को साकार करने के लिए प्रत्येक भारतीयो  में राष्ट्र भावना तथा  समन्वित स्थापित करना  बहुत ही जरूरी है। अगर राष्ट्र भावना तथा समन्वित प्रत्येक  भारतीयों  में स्थापित हो जाय तो हम कांटो में भी फूल खिला सकते है।

* सांस का हर सुमन है वतन के लिए।कह गईं फांसियों में फांसी गर्दनेंये हमारा नमन है वतन के लिए।


अंत में मैं अपनी वाणी को विराम देने से पहले अपने देश  के उन अमर शहीदों का क्ष्रदंजली  अपृत करता हूं जो अपने देश को गुलामी से मुक्त करने के लिए अपनी जान गवां दिए।


* मिट जाऊंगा रण में या मिटा दूंगा ।ए  गद्दारों की हुकूमत मरते दम तक यही कहूंगा ।


इंकलाप  जिंदाबाद
                        जय हिन्द
                                    जय भारत



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