जीवनी एक गरीब परिवार की

एक दिन की बात हैं। गांव में  एक  छोटा सा परिवार  रहता था । जो बहुत ही गरीब  परिवार  था। वो लोगों के घरों में  कुछ भी काम करता  और   उसके बदले जो मिलता पैसा या चावल   लेकर  शाम को घर लौट आता । इसी तरह अपना परिवार के साथ जिदंगी गुजारता था ।

उस गरीब आदमी का नाम  था रमन नाथ उसके  चार बच्चें थे।  दो बेटा और दो बेटी  दोनों बेटियों को शादी  हो चुकी थीं। और दोनों बेटे अपने पिता रमन नाथ के साथ सुबह को कम की तलाश में निकल जाते। अगर किसी के घर में काम मिलता तो कर लेते नहीं तो फिर अपना घर वापस लौट आते ।

एक दिन रमन नाथ अपने दोनो बच्चों लेकर जंगल की ओर लकड़ी लाने  चल दिए।  लकड़ी काट कर तीनों अपना अपना बोझा बांध कर एक पेड़ के नीचे बैठ कर  आराम कर रहे थे।
तभी  जंगल के रास्ते से  होकर  गाॅव  के एक बच्चा  शहर से पढ़ाई कर के अपने चाचा के साथ मोटर साइकिल में बैठ कर घर लौट रहे थे,
तो अचानक उनके छोटे बेटे श्याम नाथ का नजर उस बच्चे पर पड़ा। तो उसने अपने पिता से पूछा ?
बापू ये गाॅव  छोड़ कर बाहर पढ़ने  क्यों जाता है,
तो श्याम नाथ के पिता ने जवाब दिया , बेटा ये हमसे बड़े लोग हैं। इनके पास ज़मीन जयदात धन दौलत बहुत है इस लिए ये लोग अपने बच्चो को शहर पढ़ने  भेजते है। श्याम नाथ ये सब बात सुनकर दुःखी हुआ और मन ही मन रोने लगा । तभी बड़ा भाई रामनाथ ने पीठ सहलाते हुए कहा भाई  तू  रो मत।

अगर तुम्हे भी पढ़ना है तो, मै ओर पिता दोनो काम कर के पढ़ाएंगे ओर तुम्हे भी अमीर आदमी बनाएंगे ।
तुम्हारे पास भी गाड़ी होगी पैसा होगा ।मान - सम्मान और अलग पहचान होगा ।
यह कह कर तीनों बाप बेटे  अपना अपना बोझा उठाएं और घर की और चल दिए। उस दिन से बड़ा भाई राम नाथ अपने छोटा भाई श्याम नाथ के पढ़ाई का खर्चा उठाने लगा ओर उनके पिता घर के खर्चा उठाने लगा ।ओर छोटा भाई पढ़ाई में ध्यान देने लगा  ।
दिन गुजरते गए अपना मेहनत करते गए।
फिर एक साल ऐसा  आया जिसमें अकाल पड़ गया  वर्षा नहीं हुआ खेतों के सब फसल नस्ट हो गए। पशु पक्षिया प्यास में  मरने लगे  नदी तालाब सूखने लगे  ।
गाव  के  जमीनदार लोगो के पास भी कुछ काम नहीं जो   गरीब लोगो को काम  दे सकते । इस स्थिति में  लोगो के पास खाने के लिए मकई ओर बाजरा के अलावा कुछ भी नहीं था इसी तरह मकाई ओर बाजरा को उबाल कर खाने लगे ओर रहने लगे। श्याम  नाथ छोटा बेटा इसी गरीबी में सुबह को बाजरा खा कर पढ़ने चला जाता  ओर शाम को घर लौट आता घर में अगर कुछ खाने मिलता तो खाता नहीं   तो  यूं ही पानी पीकर सो जाता ।

ऐसे ही सोते  देख कर उसकी मा अपनी आंसु नहीं रुक पाती,
ओर सोचती ख़ास इस समय अपने बेटों को भूख मिटा पाती चाहे मै भूखी सो जाती । आखिर मा तो मां होती है।


इसी तरह  भूखा  रहकर  भी अपना   पढ़ाई पूरा कर लिया  ।
ओर उसे एक शिक्षक के रूप में सरकारी नौकरी  मिल गई।
उसके माता - पिता ओर  भाई बहन उस दिन धूम धाम से खुशियां मनाने लगे।
ओर खुसी से रहने लगे  ।तभी  श्याम नाथ (शिक्षक) को अपना कष्ट याद  आई  ओर अपने परिवार वालों के साथ बैठ कर फैसला किया की मै गाॅ व  में एक स्कूल खोलूंगा  ओर
 गाव  के सभी बच्चो को फ़्री में पढ़ाऊंगा  ।

धन्यवाद..........

 दोस्तो कैसे लगा  मेरा कहानी कॉमेंट में जरूर बताएं।


लेखक:- तपन रजवार

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