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Showing posts from October, 2019

डायन की नज़र

प्यारा सा एक गांव था।  बदलते  मौसम में लोगों को कोई प्रकार की बीमारियां हो जाती और लोगों को लगता ये डायन- भूत की साया पड़ गई हैं। आइए जानते हैं उस  गांव के बारे में, उस गांव में अगर किसी बीमारी से जवान बेटे या पति का मौत हो जाता है तो लोग उस औरत को डायन समझने लगते थे। उसके साथ उठना बैठना  ठीक नहीं समझते  डरते थे उससे,  गांव के किसी भी  लोगों को अगर कोई छोटी बिमारी  जैसे  अच्छी नींद न होने के कारण  माथा ( सर) में दर्द सही भोजन या ठीक से भोजन न करने पर पेट में दर्द  आदि ऐसे छोटे- छोटे कोई प्रकार की बीमारियां हो जाती तो  लोग समझते ये सब डायन की काम हैं ।  घर से निकलने के बाद रास्ते में  कहीं उस तरह की औरत  मिल गई  जिसका पति या बेटा का किसी कारण से मौत हो गई हो  और  जिस काम के लिए निकला  और वो काम नहीं बना तो लोग उससे देख कर भड़क जाते और उससे क्रोध से बात करते तथा  मन ही मन   बहुत सारा गाली  दे जाते। क्या सच में डायन होती हैं ?.... यही जानने के लिए  मै उस ...

लटकती लाश

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बहुत दूर तक फैला हुआ एक जंगल था। पक्षियों की चहचाहट से तो सबको अच्छा लगता। लेकिन खूंखार जानवरों की आवाज़ से इंसान डर जाता था। उसी जंगल के उस पार  एक छोटा सा गांव बसा  हुआ था । गांव की जनसंख्या भी कुछ ख़ास नहीं थी। दुर्भाग्य की बात ये थी कि जंगल के बीचोबीच से होकर उन लोगों को गुजरना पड़ता था घर की रोजी रोटी के लिए  अपने परिवार के लिए क्यों कि बिना मेहनत का कुछ नहीं मिलता। इसलिए उन लोगों को जंगल के रास्ते से होकर गुजरना पड़ता था। रास्ता भी कुछ ख़ास नहीं कच्ची रास्ता बारिश के दिनों में तो ओर ज्यादा परेशानियां 10 km तक कीचड़ झेलनी पड़ती तब पक्की रोड का नसीब होता। ठंड का मौसम था दिन जल्दी- जल्दी ढल जाती इसलिए सब लोग अपना घर सूरज ढलने से पहले पहुंच जाते ।एक दिन किसी काम से एक आदमी को देर रात लगभग समय 12 बज़ चुके थे और उस जंगल के रास्ते से होकर वो अपने घर लौट रहे थे। पूर्णिमा की रात थी चांद- तारे टिमटिमा रहे थे। तभी रास्ते के किनारे एक पेड़ पर लटकते एक लाश को देख आदमी घबरा गया बहुत डर गया शरीर का रोम रोम खड़ा हो गया मुंह से कोई आवाज़ नहीं एकदम सन्नाटा डर के मारे उस लाश क...